जीवनसाथी

तेरा हाथ हो मेरे हाथ में l ना डर लगे फिर साथ में ll ना कोई चिन्ता मुझे सताए l जब तू मेरा साथ निभाएं ll कैसी भी सोच हो किसी की l नहीं  परवाह मुझे किसी की ll तेरे लिए सब से लड़ जाऊंगा l सातो जन्म साथ निभाऊंगा ll तुमनें ही मुझे समझा l तुमनें ही मुझे जाना ll अपनों ने न की परवाह l मुझे बना दिया बेगाना ll हर मुश्किल में मेरा साथ निभाया l जब से तुम्हे जीवनसाथी बनाया ll खुश हू मैं,मुझे जो तुम मिल गयी l तुम्हें पाकर मेरी जिंदगी सवर गयी ll सोचता Continue reading जीवनसाथी

मेरे गीत नीलाम हो गये

मेरे गीत नीलाम हो गये अमोल बोल बदनाम हो गये दुल्हन-सी कुँवारी लय थी सुमधुर वह श्रंगार किये थी सजी सजायी शब्द पालकी भावी सुख का संसार लिये थी अर्थ भाव थे, समधी सुर थे पल में सब बदनाम हो गये मेरे गीत नीलाम हो गये अमोल बोल बदनाम हो गये सजी गीत की इक डोली थी बोल खड़े थे बाबुल द्वारे मंगलाचरण गाते गाते भाव विभोर हुए थे सारे मन पायल के भाव नुपुर थे पल में सभी नीलाम हो गये मेरे गीत नीलाम हो गये अमोल बोल बदनाम हो गये तभी उठी आवाज कहीं से देखो तुम भी Continue reading मेरे गीत नीलाम हो गये

आने वाली यादों मे हो तुम

आने वाली यादों मे हो तुम मेरी उम्मीद ,,, टूटे अरमानो मे हो तुम जो हो न पाये पूरे उन वादो मे हो तुम … हवाओ की रवानी मे हो रात की तनहाई मे हो सावन की बौछार मे हो तुम बसंत की बहार मे हो तुम कहा कहा बताऊ ? इंतजार मे हो मेरे  इकरार मे हो मेरे अधूरे प्यार मे हो मेरे मेरे बहाने मे हो तुम…. मेरी उदासी मे हो तुम मेरी खामोशी मे हो तुम टूटती बिखरती इस कहानी मे हो तुम.. आने वाली यादों मे हो तुम……..

फिर सावन आया है

सावन फिर सावन आया है फिर तुमसे मिलने को मन करता है तुम्हारी बातो की बौछारों मे फिर से भीग जाने का मन करता है॥   फिर सावन आया है फिर तुम्हें को निहारने का मन करता है मेरी भीगी आंखो मे देखो तुम्हें फिर से पुकारने को मन करता है॥   बिगड़ता -उजड़ता रहता हूँ तेरी यादों मे फिर सावन आया है तो तुमसे मिलने को मन करता है॥   फिर सावन आया है फिर प्यार तलाशने का मन करता है उलझी हुयी तुम्हारी भीगी जुल्फों को सुलझाने का मन करता है॥   फिर सावन आया है फिर तुमसे Continue reading फिर सावन आया है

सागर तट

सागर तट पर बैठ किनारे तू बाट जोहता मेरी है लौट रही क्या किश्ती मेरी तू राह जोहता मेरी है। तूने ही मेरी किश्ती को जरजर काया दे रक्खी थी टूटी-सी पतवार बिचारी मेरे हाथों दे रक्खी थी फिर प्रचंड तूफां को तूने फुसलाया था, बिचकाया था ऊँची उठती लहरों को भी चुपके से जा उकसाया था अब क्यूँ पछताता है तू ही कुछ कुछ गल्ती तो मेरी है अब क्यूँ उदास बैठ किनारे तू बाट जोहता मेरी है। सागर तट पर बैठ किनारे तू बाट जोहता मेरी है लौट रही क्या किश्ती मेरी तू राह जोहता मेरी है। हर्षित Continue reading सागर तट

मै प्रकृति होना चाहती हु

मै प्रकृति होना चाहती हु नीले आसमान तले ढ़ेर सारी बदलियों के धुंधलके मे छिपी हुई पहाड़ियों को दूर तलक देखना चाह्ती हुं पर्वत की चोटी से घाटी की तली तक श्वेत भुरभुरी बर्फ को पिघलते बूंद-२ बहते देखना चाहती हुं पर्वत के शिखर पर गिरती सुनहली किरण को अपनी आंखो की चमक मे बदलते देखना चाहती हुं जहां तक नजर जाये उस हर एक ऊंचाई को अपने कदमो तले झुका कर फतेह पाना चाहती हुं पहाड़ के उदार सीने मे छिप कर, उसके आलिंगन मे उसकी विशालता को महसूस करना चाहती हु पवन की पुछल्ली बन ,दूर-2 तक अपने Continue reading मै प्रकृति होना चाहती हु

हालात

हालात हालात इंसान को सब कुछ सीखा देता हैl बच्चे को अपनी उम्र से बड़ा बना देता है ll कौन है जो बचपन को जीना नहीं चाहता l हालातों के आगे वो भी मजबूर हो जाता ll बुरा इंसान नहीं, बुरे तो हालात होते है l जो इंसान को क्या से क्या बना देते है ll हालातों को अपनी कमजोरी मत बनाओ l सामना करो पर कभी घुटने मत टिकाओ ll हालात ही है जो हालातों से लड़ना सिखाते हैl हालात ही है जो अपनों की पहचान कराते है ll मुश्किल हालातों से सभी को गुजरना पड़ता है l जीतता Continue reading हालात

गुरुर

गुरुर इंसान का खुद को खा जाता है l बुरा समय कभी कह के नहीं आता है ll आज तेरा कल औरो का समय आएगा l क्यों करते हो गुरुर,सब यही रह जाएगा ll पल दो पल की ,जिंदगी हँस के बिता लें l ना जाने कब सांसे अपना पीछा छुड़ा लें ll नफरत के बीज बोकर क्या मिल जाएगा l क्यों करते हो गुरुर,सब यही रह जाएगा ll सोना, चांदी, बंगला या हो नौकर चाकरl भूख मिटेगी सिर्फ गेंहू की रोटी खाकर ll सोने का टुकड़ा भूख नहीं मिटा पाएगा l क्यों करते हो गुरुर,सब यही रह जाएगा ll Continue reading गुरुर

दहेज़ की आग

सिसकती हुई वो आवाजेंl चीख-चीख के ये कह रही l माँ आकर तू मुझे बचा ले l दहेज़ अग्नि में दहक रही ll जन्म लिया क्या गलती की ? परायो को भी अपना लिया l चंद कागज़ के टुकड़ो खातिर l मुझसे कैसा ये बदला लिया ll कहाँ गये वो सात वचन ? निभाने का जो वादा किया l वादे की थी, वो साक्षी अग्निl उसी के हवाले मुझे किया ll करती थी मन से उनकी सेवा l ना कभी मैंने कोई शिकवा की l फिर क्यों लालच के भेडियो ने l मार-मार के मेरी ये हालत की ll इसकी Continue reading दहेज़ की आग

अधिकारो का दुरुपयोग

दुनिया बदली,समय बदला, बदल गया इंसान l नहीं रही अब नारी अबला, ये शक्ति है महान ll आरक्षण मिला कानून बने मिले सब अधिकार l हर क्षेत्र में नारी आगे,अब ना होगा अत्याचार ll अच्छा है नारी करे, अधिकारों का उपयोग l ऐसी भी कुछ नारी है जो करती है दुरूपयोग ll जेब काटे, झूठ बोले ,बोले उसने मुझे सताया l दहेज़ का इल्जाम लगा,बेक़सूर जेल भिजवाया ll नारी की रक्षा में कितनी संस्था सामने आई l पुरुष रक्षा नाम से क्या कभी कोई बन पाई ? आओ मिलकर हमसब ऐसा समाज बनाए l कभी कोई कानून का दुरूपयोग ना Continue reading अधिकारो का दुरुपयोग

जल बचाएँ, जीवन बचाएँ

बूँद-बूँद से भरता है सागर l जल की कीमत को पहचानो l व्यर्थ करो ना कभी तुम इसको l जल अमृत है,ये तुम जानोll व्यर्थ अगर जल बहता जाये l समय पर पानी मिल न पाये ll बिन पानी फिर प्यास सताये l पल-भर भी हम जी ना पाये ll जल से ही खेती लहराए l चारो और हरियाली छाएll जल है प्रगति का उपहार l जल संचय करो बारम्बार ll नहाना हो जब भी अगर l बाल्टी में लो पानी भर ll ब्रुश जब भी किया करो l मग्गे में पानी लिया करोll जल की कीमत जिसने जानी l Continue reading जल बचाएँ, जीवन बचाएँ

आलौकिक शक्ति

कोई तो शक्ति है इस ब्रह्माण्ड में l जो किसी को नज़र नहीं आती l किन्तु किसी न किसी रूप में l अपने होने का आभास कराती ll कैसे एक माँ की कोख में l शरीर के अंग बन जाते है ? आँख ,नाक सब एक से l चेहरे अलग नज़र आते है ? कैसे सूरज की दस्तक से l ये अंधकार मिट जाता है? चंदा मामा के आते ही l सूरज कहाँ छिप जाता है ? सांसो की डोरी जब टूटती l कैसे शरीर ढेर हो जाता है ? कहाँ चली जाती वो सांसे l कोई समझ नहीं पाता Continue reading आलौकिक शक्ति

मन का बोझ

सुनाता हू दास्ताँ उन्हें अपना समझकर l अनसुना कर देते है पागल समझकर ll नहीं कहता तो दिल परेशान हो जाता है l कहता हू क्योकि मन हल्का हो जाता हैll कहते है अपने तो अपने होते है l परायो में भी अपने छिपे होते है ll कभी अपने भी दगा दे जाते है l कभी पराये साथ निभा जाते है ll कैसो हो पहचान समझ न पाया l कौन है अपना यहाँ कौन पराया ll मन पर बोझ नहीं रखा जाता l सो  अपना समझ,दुःख बताता ll जो दुःख आना है वो जरूर आएगा l बस कह सुनकर कम हो Continue reading मन का बोझ

अब इतना उनको याद न कर

जिंदगी यू बरबाद न कर … जो भूल गए तुझे…. भूल तू उनको इतना उनको याद न कर॥ वो दोस्त न थे न साथी थे … तेरे बस हमराही थे … तू उनको भूल के आगे बड़ … जो वक़्त गया उसे जाने दे… अब सोच के पल बरबाद न कर॥ क्यो सोचता है तू बाते उसकी फिकर तू उसकी छोड़ दे वो कहती है ना नफरत है… मायूस ना हो तेरी किस्मत है॥ खामोश ना रह नादान वो पागल… जो हुआ उसे अब जाने दे तू उनको भूल के आगे बढ़ अब वादो पर विश्वास ना कर… अब इतना Continue reading अब इतना उनको याद न कर

मन के झूठे मै ख्वाब लिखूँ

कुछ बात लिखूँ जज़्बात लिखूँ या मन के झूठे मै ख्वाब लिखूँ मै लिख तो दु सब बाते तेरी… पर लिखूँ तो क्या बात लिखूँ तू भूल गयी तो भूल गयी जा तेरी मै क्यो बात लिखूँ…   टूटे अपने अरमान लिखूँ या तेरा झूठा वाला प्यार लिखूँ मै अपने मन के घाव लिखूँ या दिल के अपने हाल लिखूँ अभी धूप लिखूँ की छाव लिखूँ या खूब अंधेरी रात लिखूँ. ॥     कुछ बात लिखूँ जज़्बात लिखूँ या मन के झूठे मै ख्वाब लिखूँ मेरी बातों को न समझेगी…पगली  क्यो समझाने की बात लिखूँ… मै लिख तो दु तेरी Continue reading मन के झूठे मै ख्वाब लिखूँ