कर्ज

नीले सागर की उन्मादी लहरों पर लिखूं कोई प्रेम कविता आज, अपनी नशीली आखों से, कुछ रोशनाई उधार दे दो मुझे। शब्द हो जायें अमर मेरे, घुल कर तेरे माधुर्य में, अपने रसीले अधरों से, कुछ मधु रस उधार दे दो मुझे। तुम्हारे मखमली कपोलों के सरोवर में, तैरता है जो धवल कोरा कागज, करूँ उस पर उत्कीर्ण मन के भाव. कुछ जमीन उधार दे दो मुझे। दुनिया के शब्द बाणों से घायल, क्षणिक विश्राम चाहिए कविता को, अपनी जुल्फों की शीतल छाँव में. कुछ एकाकी पल उधार दे दो मुझे। बिछुड़ गए थे जो स्वर्णिम पल, हमारे रुपहले अतीत Continue reading कर्ज

ग़ज़ल

आंखों का काजल आंखों के काजल की महिमा बडी महान। लाखों घायल हुए और ले ली कितनी जान।। युवाओं में लगा दी जिस गाने ने आग। आंखों का वो काजल सबने रखा ध्यान।। इंटरनेट पर मग्न है भीड़ युवाओं की इस साल। काजल के पीछे पड़ा विद्वानों का सारा ज्ञान।। आंखों में बसाता कोई आंखों से बतियाता। आंखों के काजल में रहता न कोई भान।। आँखे पल पल देखती दुनियाँ की टेढ़ी चाल। काजल लगाकर बढ़ा रहे सारे अपनी शान।। कवि राजेश पुरोहित श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी पिन 326502 मोबाइल 7073318074

कविताएँ

आर्य संस्कृति बन सन्यासी देश जगाया युवाओं को जिसने जगाया व्यर्थ सारे जग के आडम्बर सत्य राह पर जिसने चलाया भारत की आर्य संस्कृति को सारे जग को जिसने बताया वह युवा सन्यासी प्रखर वक्ता जिसने मानव धर्म सिखाया शिकांगों के धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म का परचम लहराया विश्व गुरु भारत केवल अपना जहाँ का पत्थर भी पूजवाया आस्था भाईचारे की मिसाल आर्यावर्त ने सारा जग महकाया वंदे मातरम नारे को अपनाया सच पूछो भारत वही कहाया कवि राजेश पुरोहित श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी पिन 326502 ************************ : अदम्य साहस प्रखर तेज दयानंद सा अब युवाओं में कहाँ है देश Continue reading कविताएँ

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ l बेटी हमारा अभिमान है l जीने का हक़ इनको भी है l इनमे भी तो, जान है ll दो सामान अधिकार बेटी को l ना कोई भेदभाव करो l अच्छी शिक्षा देकर इनको l इनके पैरो पर खड़ा करो ll बेटियाँ है हर क्षेत्र में आगे l आज नहीं बेटो से कम l न हो कन्या भ्रूण हत्या l आओ प्रण ले, आज हम ll बेटा-बेटी एक समान है l दोनों को दे प्यार हम l माँ ,बहन का रूप है बेटी l इनको दे सम्मान हम ll माँ ,बहन का रूप है बेटी l Continue reading बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

चहकने लगी शराब (ग़ज़ल)

जब से मिली तेरी सोहबत, चहकने लगी शराब, देख तेरी परवाज़ अब्र में, चहकने लगी शराब। फ़लक से जो उतरा शबाब, चमन-ए-दहर में, पाकीज़ा खुशबु से उसकी, महकने लगी शराब। तेरी शोखियाँ से मुत्तासिर, पैमाने छलक गए, जाम ने जो छुआ होठों को, बहकने लगी शराब। जल रही थी चिंगारियां जब, दो दिलों के दरमियाँ, चिंगारी एक यहाँ भी गिरी, दहकने लगी शराब। बड़े बेआबरू होकर, तेरे मयखाने से जो निकले, सितारों को देख गर्दिश में, सिसकने लगी शराब। महताब की तबस्सुम पे, इतना मत इतरा ‘ एकांत, गुफ्तगू जो हुई आफ़ताब से, मचलने लगी शराब। (किशन नेगी ‘एकांत’)

ग़ज़ल (तड़पता है दिल यहां)

नज़ाकत देख तेरी शोखियाँ की , मचलता है दिल यहाँ नादान्स्तिा में करके मोहब्बत, मचलता है दिल यहाँ मेरे इख़्तियार में ना था, चाँद हो मेरे आगोश में, तड़पता है महताब वहां, तड़पता है दिल यहां। एक आशना की जुस्तुजू में, गुजर गई एक हयात, बिजली कड़की आकाश में, कड़कता है दिल यहां। ख़लिश है दिल में आज भी, खामोश क्यों रहा, तू धड़कती है वहां, और धड़कता है दिल यहां। क़ासिद बना इख्लास का, ये मुहाजिर तेरे शहर में, फड़कती है तू वहां, और फड़कता है दिल यहां। इन्तिक़ाम की आग में, उठता है धुआं ‘एकांत‘, वो दहकती है Continue reading ग़ज़ल (तड़पता है दिल यहां)

भूल गया (ग़ज़ल)

पैमाना खा गया धोखा, अब्र शराब गिराना भूल गया, जमीं तड़पती रही प्यासी, अब्र शराब गिराना भूल गया। शायर ने ग़ज़ल से कहा, कभी ख्वाब में भी आया करो, सारी रात ग़ज़ल लिखी, ग़ज़ल ख्वाब में आना भूल गया। हुस्न ने शायर से कहा, कभी नजरें मिला लिया करो, देखा जब हुस्न को, शायर नज़र मिलाना भूल गया। कहकशाँ की महफ़िल में, मसरूफ था महताब भी, रात उतर आई जमीन पर, चाँद निकलना भूल गया। तुझसे रक़ाबत कैसे हो, जब तू ही मेरी तसव्वुर है, तेरी परवाज़ देख कोहसार में, सांस लेना भूल गया। हाथ में मशाल लिए, आई जलाने Continue reading भूल गया (ग़ज़ल)

अनछुए सपने

अनछुए सपने मैं भी चाहती हूँ देखना कैसे मुस्कुराता है चाँद मधुर चांदनी रात में, और कैसे खिलखिलाते हैं तारे जब करते है स्नान आकाशगंगा में मैं भी चाहती हूँ देखना उस नीले आसमान को जहाँ हर कोई उड़ना चाहता है, और चूमना चाहती हूँ उसके आसमानी कपोलों को मैं भी चाहती हूँ देखना सागर की उन उतावली लहरों को जो चूमना चाहते हैं हिमगिर को और करना चाहते हैं विश्राम उसकी चांदनी चादर की शीतल छाँव तले मैं भी चाहतीं हूँ देखना कि कितनी आकर्षक दिखती है धरा बसंत की पीली चुनरिया ओढ़े और कितनी मनोहर होगा वह दृश्य Continue reading अनछुए सपने

माँ का लाडला (वीर शहीद)

माँ का लाडला (वीर शहीद) (यह दिव्य कविता गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में भारत माँ के वीर शहीदों को दिल से समर्पित करता हूँ|) जब माँ का बंटवारा हो रहा था, किसी के हिस्से पंजाब, किसी के हिस्से हिमाचल आया। मैं पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा था, मेरे हिस्से भारत माँ का आँचल आया। शहीद पड़ा था जब चिर-निद्रा में, कोई दो गज कफ़न, कोई कठौती में गंगा लाया। माँ ने सहेज कर रखा था जिसे वर्षों से, में लहरा कर वह तिरंगा लाया। धधक रही थी चिता जब शहीद जवान की, शोक जताने कोई देशभक्त, कोई नेता बेईमान आया। Continue reading माँ का लाडला (वीर शहीद)

कौन हो तुम

हाथ की धुंधली लकीरों में देखा है मैंने मुस्कुराता प्रतिबिम्ब तुम्हारा कहीं तुम मेरी करवट लेती किस्मत तो नहीं शीतल चांदनी रात में तुम्हें चुपके से मेरी निंदिया चुराते देखा है कहीं तुम मेरा अदृश्य ख्वाब तो नहीं तेरी साँसों को जिया है पल-पल पंत, निराला व प्रसाद की नायिकाओं में कहीं तुम मेरी कविता की नायिका तो नहीं अभिलाषाओं के सुनहरे पंख लगाकर तुम्हें उड़ते देखा हैं नीले अम्बर की उंचाईयों में कहीं तुम मेरी नायाब उड़ान तो नहीं क्षितिज के केसरी आँचल तले इंद्रधनुष संग तुम्हें ठुमकते देखा है मैंने कहीं तुम मेरी तेजोमय मंज़िल तो नहीं नीले Continue reading कौन हो तुम

ग़ज़ल

रिश्तों के टूटे हुए धागों को, जोड़ने की कोई बात करें, दर्पण के बिखरे टुकड़ों को ,जोड़ने की कोई बात करें | जिन जंजीरों में होकर क़ैद, तड़पे थे दो दिल कभी, उन जंग लगी जंजीरों को, तोड़ने की कोई बात करें | सागर की तूफानी लहरों ने, डुबाई थी कश्ती हमारी, आज उन लहरों के रुख को, मोड़ने की कोई बात करें | माँ के जिस आँचल का साया, रहा सदा सर पर हमारे, आओ उस पवित्र आँचल को, ओढ़ने की कोई बात करें | भीड़ में जिन यारों ने, छोड़ा था साथ हमारा ‘एकांत’, ऐसे मतलबी भेड़ियों को, Continue reading ग़ज़ल

ख्वाब जो टूट कर बिखर गए

तुझसे मिलने के बाद मेरे दिल की धड़कनों में सपनों के नन्हे बीज अंकुरित होने लगे हर क्षण इन हसीन सपनों में कुछ नए सपने जन्म लेने लगे, इन सपनों को सदा अपने दिल से लगाए रखता सपने खिलने लगे, कोपलें आने लगी मैं उनकी खिलने की छटपटाहट महसूस करता उन सपनों में मुझे बस तेरी ही तस्वीर दिखती जैसे हर सपना तेरे ही दिल की धड़कन हो जब कोई सपना रोता, जैसे तू रो रही हो जब कोई सपना मुस्कुराता, जैसे तू मुस्कुरा रही हो जब कोई सपना सिसकता, जैसे तू सिसक रही हो जब कोई सपना अंगड़ाई लेता, Continue reading ख्वाब जो टूट कर बिखर गए

मजाक एक हद तक

हम दूजे का मजाक तो पलभर में बना देते है l किंतु स्वयं वो मजाक सहन नहीं कर पाते है ll मजाक करने से पहले सहने की आदत डाले l मजाक ऐसा हो जो दिल में ना चुभोये भाले ll बाणो से लगे घाव तो कुछ दिन में भर जाते है l किंतु कहे कड़वे शब्द दिल को छलनी कर जाते है ll खुश रहने के लिए थोड़ा बहुत मजाक अच्छा है l किंतु मजाक, मजाक ही रहे बस यही अच्छा है ll मजाक करते समय अपनी जुबान पर लगाम रखे l मजाक में हमेशा दूजे की भावना का ध्यान Continue reading मजाक एक हद तक

म्हारो प्यारो राजस्थान

म्हारो प्यारो राजस्थान ***************** लागे हिवड़ा सूं भी प्यारो ओ रेतां के धोरा वालो ओ उंटा के डेरा वालो रंग रंगीलो राजस्थान घणो रसिलो राजस्थान गोडावण का जोड़ा वालो चिंकारा का जोड़ा वालो जान सूं प्यारो राजस्थान लागे रूपालों राजस्थान ऊंचा ऊंचा परबत वालो डूंगर लागे प्यारो प्यारो यो रजपूता रो राजस्थान यो घूमर वालो राजस्थान खेजड़ली की छाया वालो चम्बल नद के बीहड़ वालो ओ म्हारो न्यारो राजस्थान ओ रंग रंगीलो राजस्थान राणा प्रताप की जय वालो चेतक की यो गाथा वालो चंदन के बलिदान वालो पन्ना की स्वामिभक्ति वालो म्हारो प्यारो राजस्थान ओ रंग रंगीलो राजस्थान तीज और Continue reading म्हारो प्यारो राजस्थान

विकसित हिंदुस्तान

विकसित हिंदुस्तान **************** आओ विकसित देश बनाएँ विज़न दो हज़ार बीस अपनाएं सुंदर प्रकृति को हम बचाएं गीत खुशी के मिलकर गाएँ मरुस्थल के हम शूल हटाएँ श्रम कर हम अन्न उपजाएँ हरियाली चहुँ ओर फैलाएं रंग बिरंगे सुमन खिलाएँ सागर को भी लांघ जाएं प्रगति पथ पर बढ़ते जाएं अपना हुनर भी दिखाएं विकसित हिंदुस्तान बनाएं देश में प्रोधोगिकी बढ़ाएं और प्रक्षेपण यान बनाएँ तकनीकी हम ज्ञान सिखाएं मन से अंधविश्वास मिटाएँ निष्काम कर्म नित करते जाएँ अर्जुन सा एक लक्ष्य बनाएँ अवसादों से कभीे न घबराएं आशाओं के फूल खिलाएं देश हित मिल कदम बढ़ाएं वन्दे मातरम गान Continue reading विकसित हिंदुस्तान