तुम ज़रूरी हो

सही कहा उन्होंने की घमण्ड मत करो नहीं हो तुम इस ब्रह्माण्ड के बिंदु बराबर पर ब्रह्म तुममे भी बसता है तुम जरुरी हो | निष्क्रिय हो या प्रबल विकल हो या हो चट्टानों सा अटल तुम जरुरी हो | मत बैठो थककर इन राहों में या खोजों राह अपनी या बना स्वयं का रास्ता हो हर जगह तुम्हारी ध्वनि तुम ज़रूरी हो | अगर शहीद ना होते वैराग्य तो देश के कैसे खुलते भाग्य अगर उस आदिमानव ने न खोजी होती आग तो सभ्यता होती यहाँ ना आज तुम आज हो जो लिखेगा कल का ताना-बाना पर कैसे होगा Continue reading तुम ज़रूरी हो

एक पिता की बेचैन ख़ामोशी

एक पिता की बेचैन ख़ामोशी अपनों को मुझसे अब कोई सरोकार नहीं अपनों पर मेरा अब कोई अधिकार नहीं अपनों से हुआ कोई सपना साकार नहीं गहरे जख्म दिए मेरे अपनों ने सुनहरे पंख दिए मेरे सपनों ने उदास आंसू दिए मेरे नयनों ने मेरे सवालों का मिलता कोई जवाब नहीं उनके लिए अब मेरा कोई ख्वाब नहीं मैं अब इक काँटा कोई खिलता गुलाब नहीं मेरे लिए कोई वक्त नहीं उनके पास फिर क्यों करूँ मैं उनसे कोई आस आंसू टपक जाते जब दिल होता उदास मतलब निकल गया तो अपने भी अपनी राह निकल जाते हैं अपने ही Continue reading एक पिता की बेचैन ख़ामोशी

एक पिता की वेदना

एक पिता की वेदना पत्नी को मुझसे शिकायत माँ को मुझसे शिकायत मगर मैं किससे शिकायत करूँ पत्नी को मुझसे उम्मीदें बच्चों को मुझसे उम्मीदें माँ को मुझसे उम्मीदें मगर मैं किससे उम्मीद करूँ पत्नी को मुझसे नाराजगी बच्चों को मुझसे नाराजगी माँ को मुझसे नाराजगी मगर मैं किससे नाराजगी व्यक्त करूँ पत्नी दुखी तो मैं दुखी बच्चे दुखी तो मैं दुखी माँ दुखी तो मैं दुखी मगर मैं दुखी तो कोई दुखी नहीं सबके सुख-दुःख मैं बांटूं मेरा बांटे न कोय इस सफर में सब मतलब के यार हैं कोई किसी का न होय (किशन नेगी ‘एकांत’)

हम दुनिया में आये कुछ सबब तो होगा

हम दुनिया में आये कुछ सबब तो होगा इस हयात का किस्सा कुछ गजब तो होगा। पूछता नहीं हाल हर रोज खुदा लेकिन उसके मुस्काने का कुछ सबब तो होगा।                       … भूपेन्द्र कुमार दवे

खुदा का ये घर है पर गरीब का है

खुदा का ये घर है पर गरीब का है खुदा से रिश्ता जिसका करीब का है। यहाँ अश्कों से तर माँ का आँचल है गोद में जिसके खुदा भी गरीब का है।                       … भूपेन्द्र कुमार दवे

Here’s What I Know About Technology

Facts, Fiction and Technology Clinical research is readily one of the most challenging endeavor for virtually any medication market. The progress in technologies have a gigantic effect on interpersonal networking. Time may tell, as recent study proceeds to assess the capability of magnet technology to lower discomfort and boost the natural healing procedure for their body. Computers have been deliberately utilised to repair problems in your private and public sector for the function of raising productivity. Technological innovation plays significant part within the economical progress of virtually any nation. Subliminal technological innovation has been demonstrated to become quite powerful when Continue reading Here’s What I Know About Technology

What Everybody Dislikes About Technology and Why

Technology at a Glance Consider moving into the distributors places of work for training before buying. While automobiles which could push themselves are still still a few years off, auto makers are starting to go past the testing period. KPMG It is believed to become among the desktop verification companies in India. What You Need to Know About Technology There is really been a exceptional progress in improvement of RAM that plays an essential role in the overall operation of their laptop. Before you get a new computer, produce a list of each one the scenarios you need to utilize Continue reading What Everybody Dislikes About Technology and Why

दर्पण मत दिखला छवि तन की

दर्पण मत दिखला छवि तन की चिंतित होते चंचल मन की। मैंने चिंतन के उबटन से धो डाली है चिंता सारी फिर भी कुंकुम-सी माथे पर बची हुई है कुंठा कोरी। वुद्ध व्यथा का परिधान पहन मत दिखला छवि चिर यौवन की दर्पण मत दिखला छवि तन की। अन्तरहित-सी धधक रही नित दग्ध हृदय में चिर ज्वाला-सी कलुषित कर्मों की काजल की खींच चुकी है रेख व्यथा की। अब मुरझायी मुस्कान पहन मत दिखला विसरित छवि मन की दर्पण मत दिखला छवि तन की। बहते आँसू की छवि दारुण देख नहीं कर पाती आँखें भूली बिसरी यादें फिर से नहीं Continue reading दर्पण मत दिखला छवि तन की

धरूँ क्या मैं ध्यान तुम्हारा

सम्मोहनी सृष्टि की हर कृति मन विचलित कर जाती है। हरियाली दिव्य धरा की मेरे द्दग को छल जाती है। यूँ विचलित मन पाकर मैं अब धरूँ क्या मैं ध्यान तुम्हारा। चंचल मन में मेरे तो चपल चाँदनी बिंध जाती है। प्रख्य प्रकृति के पलने पर प्राण प्रफुल्लित कर जाती है। यूँ चंचल मन पाकर मैं अब धरूँ क्या मैं ध्यान तुम्हारा। मेघों की गर्वित गर्जन मौन शिखर से टकराती है। क्षीण शक्ति मृगयों की सी भक्ति भ्रमित कर जाती है। यूँ भ्रमवश मन पाकर मैं अब धरूँ क्या मैं ध्यान तुम्हारा। नभ नक्षत्र निरभ्र निशा में कुछ नटखट से Continue reading धरूँ क्या मैं ध्यान तुम्हारा

रोशन करैं कोई चिराग

रोशन करैं कोई चिराग आओ मिलकर रोशन करैं कुछ चिराग तलाशते हैं कोई नयी रौशनी रात कोई तूफ़ान आकर बुझा गया जलता हुआ चिराग सवांरते हैं कोई बुझी रोशनी हुआ है मद्धम इस शहर में इक चिराग अभी-अभी तराशते हैं कोई मद्धम रौशनी रूठ कर कुछ ख्वाब गुम हो गए हैं रात के सन्नाटे में ढूंढते हैं जलाकर कोई रौशनी कोई मुसाफिर भटका गया है टेढ़े-मेढ़े रास्तों में दिखाते हैं राह थमाकर रौशनी (किशन नेगी ‘एकांत’ )

पलकों की छाँव में (मुक्तक)

पलकों की छाँव में (मुक्तक) पलकों की छाँव में बिता लेने दो इक रात तेरी तन्हाइयों से कर लेने दो मन की बात चांदनी घूंघट ओढ़े दुल्हन बन कर शर्माना ये चाँद होगा और होगी सितारों की बारात बहती हवा के संग जब घर से निकलते हैं तुमको न पाकर ये नादाँ आंसू पिघलते हैं गुजरता जब तेरी दिल की गली से होकर तेरी हिचकी की आहट से पाँव फिसलते हैं समंदर की लहरों ने गाया कोई तराना है सूरज ने लिखा उसे दिल का अफ़साना है सिंदूरी शाम ढलते ही करना इंतज़ार मेरा इस कम्बक्त को तेरे आगोश में Continue reading पलकों की छाँव में (मुक्तक)

जब हंसिनी उड़ चली

जब हंसिनी उड़ चली अपनी तो आजकल ठीक-ठाक कट रही हैश्यामल बादलों की मनहूस घटा हट रही हैतुम्हारा हाल तो तुम ही जानो जनाब मगरअपनी तो नई पड़ोसन से अच्छी पट रही है कल शाम छज्जे पर खड़ी थी नज़रें हुई चारखिड़की से टुकुर-टुकुर देखते रहे बार-बारदिल में जवानी के ज्वार-भाटे उमड़ने लगेजैसे पतझड़ के आँगन में आयी बसंत बहार कल चांदनी रात में वह छत पर टहल रही थीगजगामिनी के संग शोख हवा मचल रही थीचाँद की सफ़ेद रौशनी में कोई अप्सरा थीकमसिन जवानी देख रात भी बहल रही थी इक दिन कोई हंस दामिनी को उड़ा ले गयामेरी Continue reading जब हंसिनी उड़ चली

माँ, मैं तुझे यूँ हर रोज याद कर लिया करता हूँ

माँ, मैं तुझे यूँ हर रोज याद कर लिया करता हूँ अपने अंतस्थ में रोज अमृत भर लिया करता हूँ। तुमसे दूर हूँ पर तेरी तस्वीर से कभी कभी मन बहलाने कुछ देर बातें कर लिया करता हूँ। जब भी बीमार होता हूँ, तेरे हाथों से दवा मैं सपनों में तुम्हें ही बुलाकर लिया करता हूँ। सुकून औ खुशी की तलाश में, मैं क्या नहीं करता अंधेरे में तेरा उजाला भर लिया करता हूँ। ये तेरे संस्कारों की सौगात का ही असर है मैं तेरा दर्शन मंदिरों में कर लिया करता हूँ। मैं पलकें तेरी याद में भिंगा लिया करता Continue reading माँ, मैं तुझे यूँ हर रोज याद कर लिया करता हूँ

उसका पता नहीं (ग़ज़ल)

चांदनी रात में चाँद का पता नहींचाँद है पास मेरे उनका पता नहीं परवाने को जलते देखा रात भरजली है शमा भी इसका पता नहीं इश्क़ की चिंगारी कोई भड़की हैधुवाँ-धुवाँ हुआ है कौन पता नहीं हुस्न के आगोश में बैठा है बादलशराब बरसेगी या पानी पता नहीं इन साँसों पर न कर गरूर इतनाआज हैं मगर कल का पता नहीं यारों से जो वादे किये थे जवानी मेंहम तो निभा रहे उनका पता नहीं जिसकी ज़ुस्तज़ू में निकला ‘एकांत’कारवाँ गुजर गया उसका पता नहीं (किशन नेगी ‘एकांत’)

चांदनी ओ मेरी चांदनी

चिराग लेकर घूमता रहा मैं सारा जहाँ मिली न कोई मेरी जैसी मधुर चांदनी कुहासी रातों को रोशन करे जो चिराग वो चाँद भी लज्जा गया देख मेरी चांदनी देखकर जलता होगा वह भी मन ही मन बनाई होगी किसने ये दिलकश चांदनी खोजता हूँ जिसे दूधिया चन्द्रिका रात में गुम गई थी कल यहीं कहीं मेरी चांदनी क्या सुहानी रात है भोर अभी बाक़ी है रूठ कर जाने की जिद न करो चांदनी जब से तुझे देखा है चाँद को भूल गया स्वर्ग से उत्तरी अलौकिक नन्ही चांदनी घूँघट खोल कलियाँ भी निहारें चुपके से थी विस्मित कौन है Continue reading चांदनी ओ मेरी चांदनी