अकथ 2

मैं हर एक पल से जो पूछू , वो बात तेरी ही करता है.
ये मेरा दिल मेरा होके भी, फ़रियाद तेरी ही करता है.
इलाही ने ये मुझसे पूछा कल आकर ये चुपके से,
क्या मैं भी याद कर लू उसे, याद जिसे तू करता है.

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