अधूरी कहानी

अधूरी कहानी

लौटाने थे आये, वो मेरे खत मुझे
पूछा कि कैसे जिओगे, तो अल्फाज़ जैसे जल गये।।

लिया जो हमनें हथेलियों में, मुखङा उनका
आंखे रहीं गुमसुम, पर इकबारगी वो भी मचल गये।।

पलकों में छुपा रहे थे, तसव्वुफ़-ए-शबनम हमसे
इस कोशिश में वो मेरे ताउम्र के जज्बात कुचल गये।।

पूछा जो हमनें बिखरी हुई जुल्फों का सबब
दिखा किसी और के नाम की मेंहदी, वो सरे राह बदल गये।।

कहते थे कि उनके वादे हैं, अबद-ऐ-आलम-अज़ीम
हल्की सी धूप क्या पङी, बर्फ से भी जल्दी पिघल गये।।

की जो हमने तस्दीक, कैसे थामा दामन-ए-गैर
बङी मासूमियत से बोले, अनजाने में फिसल गये।।

उनके बिन, इक इक सांस सदियों का सफर हो गयी है,
ओ लोग देतें हैं हिम्मते दाद……….
कि “उत्तम” तुम कितनी आसानी से सम्भल गये।।

About Uttam Dinodia

दोस्तों, जिन्दगी की भागदौड़ ने बंजारा बना दिया है। वक्त किसी के साथ ज्यादा समय रूकने नहीं देता और दिल किसी को छोड़ना नहीं चाहता। बस इन्हीं उलझे हुए लम्हात को कुछ अनकहे शब्दों से सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं और मैं "उत्तम दिनोदिया" आपसे, मेरे इन अनकहे शब्द के सफर में साथ चाहता हूं....

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