अपनों के अहज़ान का अहसास अज़ीजों को ही होगा

अपनों के अहज़ान का अहसास अज़ीजों को ही होगा,
दर्द हद से गुज़रता है तो अश्क अब्सारों में सूख जाते हैं|

हँसते चेहरे से ख़ुशी का अंदाजा लगाना मुनासिब नहीं,
कई मर्तबा तो ग़मों को छुपाने के लिए लोग मुस्कुराते हैं|

मेरी नज़र में मुफ़लिस तो वो अहसान फरामोश लोग हैं,
देखो फ़कीरों की अमीरी मुफ़्त लाखों दुआएं दे जाते हैं|

ज़िन्दगी में सामना होता है सबका अक्सर परेशानियों से,
बुलंद इरादों वाले टिकते हैं कमज़ोर अक्सर टूट जाते हैं |

मुसीबतों का सैलाब आता है तो कुछ ज़रूर सिखाता है,
तमाम सबक लेते हैं गुमान में अंधे अक्सर डूब जाते हैं |

मेरी शायरी से –

About ओम हरी त्रिवेदी

आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य , मानव होना भाग्य है तो कवि होना सौभाग्य . . . नाम- ओम हरी त्रिवेदी शिक्षा - स्नातक +तकनीकी डिप्लोमा जन्म स्थान - बैसवारा लालगंज , रायबरेली (उत्तर प्रदेश) व्यवसाय - शिक्षक

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