अमर क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का यशगान

अमर वीर महावीर तुम्हारी महिमा क्या गाऊँ,
मन करता,तेरे सम्मान में शत बार शीश झुकाउँ |

तुम राष्ट्र प्रेम की पताका लिये सदा चलते रहे,
माँ भारती की रक्षा हेतु दुष्ट दलन करते रहे|

तुमने त्यागे सुख चैन,तुमने छोडा घर बार था,
दमनकारियों के विरुद ,तुमने ठाना भीषण रार था|

विचार तुम्हारे अद्भुत थे,थी अद्भुत दिव्य देशभक्ति,
कठोर भूख हडताल से तोडी अँग्रेज़ो की शक्ति|

था काँप गया जल्लाद भी,देख तुम्हारी मुस्कान,
भयभीत हुए अफसर सारे,सुन वन्दे मातरम गान|

उस दिन रोया आकाश भी,रोयी हिंद भूमि महान,
जब फंदा चूम किया तुमने माँ भारती का आवाहान|

तेरी महानता का वर्णन करने शब्द कहाँ से लाऊँ,
शीश झुका तेरे चरणो में,विचार तेरे अपनाऊँ|

यशगान नही यह, है मेरे हृदय की निर्मल भावना,
तेरा नाम रहेगा चिर अमर बस यही हृदय से कामना|
-वीर सिंह सिकरवार

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