अमर शहीदों के प्रति

अमर शहीदों के प्रति

शहीदों को जिगर में अपने जगाकर तो देखो
कहानी उनकी, उनको सुनाकर तो देखो

सुना दो उनको अमर उन्हीं की कहानी
कहानी जो आँखों में लाती है पानी
पानी नहीं है ये है आँसू की धारा
स्मृति की झिरती हो जैसे अमृत की धारा
रोती है माता और रोती है बहना
बच्चे पुकारें हैं आजा ओ पापा

वतन यह तुम्हारा इसे आकर तो देखो
वतन की रगों में अपनी निशानी तो देखो

हिमालय तुम्हीं से सर उठाये खड़ा है
विन्ध्या के हर कण में भी हीरा जड़ा है
ये गंगा तुम्हारी व यमुना तुम्हारी
कलकलकर बहती ये नर्मदा कुँवारी
यादें तरंगित हैं सब इनमें तुम्हारी
लहरों से भी ऊँची कुर्बानी तुम्हारी

जाग उठो ए वतन के शहीदों ओ देखो
भारत के माथे तिलक आजादी को देखो

तुम्हारे बलिदान की निशानी यही है
छलकते लहू की दमकती बिंदी यही है
हमारा हौसला तुम्हीं, बुलंदी तुम्हीं हो
नौजवानों के हर बढ़ते कदम तुम्हीं हो
हर बच्चे की जुवाँ पर महकते तुम्हीं हो
इतिहास के पन्नों में दमकते तुम्हीं हो

हमारी रगों में जोश उमड़ता तो देखो
अपने वतन की आन बान शान तो देखो

तुम अमर हो जी रहे हो सारे वतन में
तुम्हीं से महक है इस प्यारे चमन में
जो बंदूक, बारूद से जरा भी न हारी
गहरे जख्मों और मौत से भी ना हारी
वो लहू की शोहरत, वो धड़कन तुम्हारी
वही साँसों में आकर बसी है हमारी

कैसे डटे हैं हम सरहदों पे तो देखो
समर में बहादुरी के करिश्मे तो देखो

हमारी जिन्दगी भी इक सफर है तुम्हारा
तुम्हारी ही मंजिल, हर कदम है तुम्हारा
आगे बढ़ते चलेंगे, जैसा तुमने सिखाया
सर ऊँचा वतन का तुम्हीं ने करके दिखाया
कभी झुकने ना देंगे ये तिरंगा हमारा
गूँजेगा गगन में सतत ‘जय हिन्द’ का नारा।
… भूपेन्द्र कुमार दवे

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