अहिंसक हो

अहिंसक हो

मेरे चित्‌ , अहिंसक हो I

शस्त्र उपयोग ,क्भी नहीं I

छल कपट , क्भी नहीं I

दुर्वचन अपशब्द ,क्भी नहीं I

जीव हत्या ,क्भी नहीं I

वनस्पति अपमान ,क्भी नहीं I

अनैतिक भाव ,क्भी नहीं I

निर्जीव पे वार ,क्भी नहीं I

ज्ञान निरादर, क्भी नहीं I

 

ना होना हिंसा का, नहीं अहिंसा का लक्षण ,

तलवार फेंक देने से, अहिंसक ना हो पाएगा ,

अहिंसक विचारों का दहन जब कर पाएगा ,

तब संपूर्ण अहिंसा की राह् तूं चल पाएगा I

 

है नही कोई मुखौटा यह , आत्मा का है पह्नावा यह  ,

है नही कोई दिखावा यह , चित्‌ का है आभूषण यह  ,

है जीवंत जीवन का दर्पण यह, प्रतिबद्धता है आजन्म की यह ,

है ख़ुद की ख़ुद से लड़ाई यह , कर विजय , संपूर्ण अहिंसक हो I

                                                   

                                                          ….. यूई विजय शर्मा

About UE Vijay Sharma

Poet, Film Screenplay Writer, Storyteller, Song Lyricist, Fiction Writer, Painter - Oil On Canvas, Management Writer, Engineer

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