आँखें

तुम हो मेरे बता गयी आँखें।
चुप रहके भी जता गयी आँखें।।
छू गयी किस मासूम अदा से,
मोम बना पिघला गयी आँखें।
रात के ख़्वाब से हासिल लाली,
लब पे बिखर लजा गयी आँखें।
बोल चुभे जब काँटे बन के,
गम़ में डूबी नहा गयी आँखें।
पढ़ एहसास की सारी चिट्ठियाँ,
मन ही मन बौरा गयी आँखें।
कुछ न भाये तुम बिन साजन,
कैसा रोग लगा गयी आँखें।
     #श्वेता🍁

About Sweta Sinha

"कुछ कही अनकही बातें मन के समन्दर में लहरें बन भावनाओं को उद्वेलित करती रहती है,भावों को मथने से जो मोती निकले उन्हें शब्द देकर रचनाओं के माध्यम से गूँथने का प्रयास किया है मैंने"

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