आँसू

आँसू

पलती नयनों में तरल तरल

करती अठखेली चपल चपल

दुःख संचित गगरी गरल गरल

ले साथ चली वह मचल मचल

छलकाती, सागर की बेटी नयनों में ……

है तृप्त ह्रदय जो दहर दहर

हो थिरक रही ज्यों लहर लहर

अवसाद मिटाती प्रहर प्रहर

दुःख के भँवर में ठहर ठहर

लहराती ,सागर की बेटी नयनों में ……..

बहती है निर्झर सी कल कल

दुःख की तान छेडती पल पल

बंद पलकों के निज भार से छल छल

पीड़ा के अंबार से विकल

उफनाती,, सागर की बेटी नयनो में………

रुदन होठों का सिसक सिसक

 

व्यथित मन की पीड़ा ले लपक लपक

मृत्यु पथ पर बढ़ती थिरक थिरक

मिट जाती, सागर की बेटी नयनों में —–

About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

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