“आंसू”

आंसू आज तक नहीं पोंछे अपनी आँखों के,

कहीं ये तेरे हाथ खाली न रह जाए।

अब तो मिलना भी बंद कर दिया है लोगों से,

जिस से तेरी निगाह सवाली ना रह जाए।

जानता हूँ मेरा तुम पर अधिकार नहीं,

सोचता हूँ फिर क्यों तेरा इनकार नहीं।

जब राह में तन्हा मुसाफिर तू ही है,

फिर क्यों दिल में तेरे मेरी ही पुकार नहीं।

इसलिए अब तुझे याद करके नहीं पीता

क्या पता यह दिल शराबी ना रह जाए।

आंसू ………

इस दिल को मयस्सर कुछ भी नहीं,

तुम बिन मेरा मुकद्दर कुछ भी नहीं।

करोगी याद तो याद आऊंगा ही,

वरना मेरी खबर अब कुछ भी नहीं।

इसलिए अब सोता नहीं हूँ रातों को अक्सर

कहीं आँखों का रंग गुलाबी ना रह जाए

आंसू ………

कहती हो कि तुम मेरे हो,

तुम ही शाम तुम ही सवेरे हो।

तुम्हे ही सोचती रहती हूँ शाम-ओ-सहर,

तुम ही हो पूनम तुम ही अँधेरे हो।

खुद ही जाने दिया तुम्हे पराया जान कर

कहीं चाहत ये तेरी इनकलाबी ना रह जाए,

आंसू …….

श्रेयस अपूर्व”मगरिब”
भोपाल

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