आखिरी रोटी भिखारी को (हास्य-व्यंग)

‘Husband home more – please help.’

घर में खुशहाली लाने का कोई उपाय पूछने
चिंतातुर पत्नी पहुंची पांडे पंडितजी के पास
शरणागत होकर बताई अपने दिल की वेदना
नहीं है सुख शांति घर में उपाय बताओ खास

नैनों में देख झरते अश्क इक अबला नारी के
पंडित जी के ख्वाब आसमान में टहलने लगे
सोलह शृंगार संपन्न मोहिनी से मिलते ही नज़र
दिल में दबे अरमान आज फिर से मचलने लगे

प्रेम सागर में लगाकर डुबकी पंडित जी बोले
सुंदरी, चाहती हो अगर घर में खुशहाली लाना
बताता हूँ अचूक उपाय, पहली रोटी गाय को
आखिरी रोटी किसी भिखारी को ही खिलाना

प्रेम सिंधु की लहरों में डूब बोली मनमोहिनी
पंडित जी मैं आपको राज की बात बताती हूँ
आपने उचित कहा पहली रोटी मैं ही खाती
आखिरी रोटी अपने पति देव को खिलाती हूँ

(किशन नेगी ‘एकान्त’ )

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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