आज फिर याद आई

आज फिर याद आई

इस बरसात में,
बहते पानी में,
बरसती बूंदों में,
यूं भीगते हुए,
तेरे साथ थे कभी,
आज फिर से तन्हा हूं,
ओर साथ में तन्हाई है,
मेरे दोस्तों,आज फिर मुझे,
उस COLLEGE की याद आई है…×2…

जब भीगते थे,
भीगाते थे,
इन बरसती बूंदों को,
चेहरे पर पङने देते थे,
मन में उठती तरंग,
ओर लेते उस अंगङाई मे,
उस वक्त में हंसने-हंसाने की,
बात जहन में आई है,
मेरे दोस्तों,आज फिर मुझे,
उस COLLEGE की याद आई है…×2..
हां उसी COLLEGE की याद आई है…. ॥

‘विराज’

About "विराज़"

"Poet"

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