आज सुर गा न सकेंगे संगीत

आज सुर गा न सकेंगे संगीत

आज सुर गा न सकेंगे संगीत
अथ में अदभुत
अंत में भरम
अनोखा परिचय
निशीथ की
विकल साँसों की
नहीं प्रात: से प्रेम
आर्द्र आँचल
निर्जल व्योम-जल
कितना सत्य
शस्य गीत की
नहीं सहेगी
प्रभंजन,शीत
प्रिय सरस सौरभ
कोमल अनुबंध
बाकी सभी शेष
दीप की लौ के
हर कॅपकँपी में
सुर मेरे होंगे संगीत ।
————- डॉ छेदी साह

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