आतुर एहसास

अमावस्या की रात
चांदनी उदास
खिड़की से ताकती
काला आकाश
घूमते फिरते बादल
जगाये आश
दूर कंही कोई आवाज़
प्रीत पद आभास
हवा का एक झोंका
स्पर्श कोई खास
घनघोर छाया अंधकार
आतुर एहसास
टिमटिमाते तारें
देते बिश्वास
रात का अंतिम मंज़र
मन में आश्वास
नया प्रभात,नई रात
मिलन है पास
सजन

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