इंद्रधनुष सा जीवन

इंद्रधनुष सा जीवन

अनंत , असीम , नील गगन सा है ईश्वर।
जिसमें सृष्टि का कण -कण समाया है।।

जलचर ,थलचर ,नभचर , असंख्य जीव है।
उत्पत्ति , संहार , पालन – पोषण पाया है।।

पल पल घुटन सिहरन तो कभी खुशी ।
इंद्रधनुष सा रंग बिरंगा जीवन हमने पाया है।।

कंटीली झाड़ियों से नील गगन में झांक कर।
आशाओं का फिर से हमने एक सूरज पाया है।।

व्यर्थ रोज के आडम्बरों ने कैसा उलझाया है।
सारा जीवन जब सच देखा ये तो झूंठी काया है।।

कोई नहीं अपना जग में गवाह नील गगन है।
दौड़ भाग सारी होगी बेकार ये तो बस माया है।।

नील गगन सी उन्मुक्त, विस्तृत सोच से।
मानव ने असीम शान्ति का अनुभव पाया है।।

– कवि राजेश पुरोहित
भवानीमंडी

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