इन आँखों की मस्ती

इन आखों की खुमारी, इन आँखों की मस्ती,
नीली झील में तैरती, प्यार की कोई कश्ती।

शबनम की नन्हीं बूंदें, इन्हीं नैनों में बसती है,
इन्हीं की अंजुमन में, चांदनी रात सजती है।

इन मदहोश आँखों से, भर गए हैं सारे पैमाने,
चली है जब से ये खबर, बंद पड़े हैं मयखाने।

चारु चंद की चंचल किरणें, दमकती पल-पल,
जिनकी आहट से, सारे जहाँ में मची हल-चल।

रातें भी कटती नहीं, तेरी यादों की तन्हाईयौं में,
दिल ढूंढता है तुझे, धड़कनों की शहनाइयों में।

झील-सी नीली आँखों में, कभी मेरा सारा जहाँ,
दिल-ए-नादाँ तड़पता यहाँ, तड़पती है तू कहाँ ]

इन आखों की खुमारी, इन आँखों की मस्ती,
नीली झील में तैरती, प्यार की कोई कश्ती।

(किशन नेगी ‘एकान्त’ )

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.