“इबादत की, मोहब्बत की…”

इबादत की,
मोहब्बत की,
उसे पाने की,
थी कोशिश की,

ना कम थे वो,
ना मोहब्बत ये कम थी,
वीरान थे साहिल जो,
तेरी लहर ने दस्तक दी,

शांत था जो,
तेरे साथ ने हलचल की,
पत्थर ‘विराज’ के दिल को,
तेरे नाम की धङकन दी,

ये सब तब ही मिला,
जब सच्चे मन से,
इबादत की,
मोहब्बत की… ॥

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