इस आँधी को मेरा आखरी सलाम भेज दे

इस आँधी को मेरा आखरी सलाम भेज दे

मेरी किस्मत की कतरनें भी तमाम भेज दे।

ए डूबते सूरज, बस इक मेहरबानी कर जा
अपनी तपस बटोरकर सुलगती शाम भेज दे।

ना पानी है, ना शराब का इक कतरा बचा है
तू अपने लबों से चूमकर इक जाम भेज दे।

कच्ची गागर है, मालूम है, फूट जावेगी
बस आखरी दरार का लिखा पैगाम भेज दे।

मैं कब से आँख मूँदे यूँ बेजान पड़ा हूँ
अब ख्वाब में साकी दरका एक जाम भेज दे।

अब की हवा का झोंका पतझर ही लावेगा
हर जर्जर पत्ते पे लिख मेरा नाम भेज दे।

मेरी हस्ती का हिसाब वो करने बैठा है
मेरी गल्तियों का चिठ्ठा गुमनाम भेज दे।

… भूपेन्द्र कुमार दवे

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