ईद आ गई

ईद आ गई

गले मिलकर मिटा लो फासले ईद आ गई।
मोहब्बत के शुरू हों सिलसिले ईद आ गई।

नए ख्याल नई ख्वाहिश हसीं ख्वाब आँखों में
खुशियों के सुहाने सफर पे चलें ईद आ गई

बढ़ जाये भाईचारा,बढ़े सुख-शांति,बरक्कत
दुआ है कोई भी न रहे अकेले ईद आ गई।

तल्खी से तबस्सुम को भी रोते हुए देखा
नफरत की आग में क्यूँ जलें ईद आ गई।

ईद की शाम भी दीवाली की तरह हो रौशन
जुदा रंगो के,चलें संग काफिले ईद आ गई।

मखमसा न हो दरमियाँ मिट जाएँ दूरियाँ

न सियासत का कोई खेल खेले ईद आ गई।

अनजान हैं क्या होगा मकसूम का मकसद
जी लें हँसकर जो भी लम्हे मिले ईद आ गई।

वैभव”विशेष”

2 Replies to “ईद आ गई”

  1. स्नेहमयी शब्दों से उत्साहवर्धन के
    लिए हृदय से धन्यवाद सर।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.