ईश्वर और शैतान

ईश्वर और शैतान

मै अपूज्य

तमाधिपति

मेरे अधीन

अन्धकार का राज्य

मेरा असुरत्व

काम ,क्रोध ,लोभ ,

मद ,मोह में समाहित

तुमने ही अपनी भावनाओं  से

किया हैं सिंचित

फलता ,आकर्षण में बांधता

कपट से छलता

बहुरूपिये बन

छुपा लेता

अपने सींग ,

नुकीले दांत

विशालकाय देह

रक्तरंजित पंजे

दबाता रहता सदा

आत्मा की आवाज़

रक्तबीज सा

कायम रहता

मेरा वजूद

हाँ ,तुम्हीं ने तो

अमरता का पान कराया

खड़ा हूँ

तुम्हारे ईश्वर के  समकक्ष

ईश्वर हैं तो शैतान हैं

शैतान हैं तो ईश्वर हैं

कि पाप की गहराइयों  से

पुण्य का पहाड़ हैं

प्रकाश रहित योजना ही

अंधकार की स्थापना हैं

देवत्व का  अभाव ही

असुरत्व का साम्राज्य हैं

About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

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