एक नई दोस्त 

एक नई दोस्त

एक अजनबी चेहरे से
आज हुई मुलाकात एक सूंदर उपवन में
शायद एक नई दोस्त
चेहरा अनजान ज़रूर था
मगर दिल से मुलाकात जैसे
सदियों पुरानी थी
मासूम चेहरा, माथे पर गंभीर रेखाएँ,
झील-सी गहरी नीली आंखें
उत्सुकता से भरी थी
गुलाबी होंठो पर एक अजीब चुप्पी
शायद दिल की पीड़ा कहना चाहती हो
मासूमियत उसके चेहरे पर
जैसे बचपन झांक रहा हो
जो उसकी उदासी बयां करती थी
मगर दिल से बहुत चंचल, चपल, मधुर
न जाने क्यों मुझे प्रतीत हुआ
जैसे दिल में अनगिनित जख्म छिपाये हो
रेशमी काले केश
जिन्हें निशा प्रहरी बनकर
सहला रही हो और उषा अपनी
सुनहली किरणों से स्नान करा रही हो
कितनी ख़ामोशी-रात्रि की नीरवता
झलक रही थी उसके भावों से
चाँद-सा सूंदर चेहरा
सूरज-सा दमक रहा था
मैंने अनुभव किया कि
दिल उसका दर्पण-सा धवल
धड़कनें मध्यम-हर सांस शीतल
वाणी में दर्द व अहसास का मिश्रण
आत्मसंवरण की अलौकिक मूर्ति
और एक दिन न जाने कहाँ गुम हो गई
उपवन में मेरी आखें आज भी
उसको हर पल ढूंढती हैं और
खोजता हूँ पवन के हर झोंके में

(किशन नेगी)

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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