ऐ बादल

ऐ बादल थोड़ा कम गरज,
मेरे इन आँसुअो के सामने;
तेरी कोई अवकात नहीं..

याद आती प्रीत की थोड़ी ज्यादा है;
सुन! थोड़ा कम बरस.
मेरी आँखें भी किसी मौषम की;
मोहताज़ नहीं……

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