औरत

औरत

औरत ने सपना देखा

चिड़िया उसे पंख दे

गुम हो गई

न जाने कहाँ

और वह चिड़िया बन

खुले आसमान में

ऊँची उडान भरने लगी

औरत ने सपना देखा

नदियाँ उसे उफान दे

गुम हो गई

न जाने कहाँ

और वह नदी बन

तीव्र वेग से बहने लगी

औरत ने सपना देखा –

पर्वत उसे दृढ़ता दे

गुम हो गए

न जाने कहाँ

और वह पर्वत बन

धरती पर अडिग हो गई

औरत ने सपना देखा –

वृक्ष उसे अपनी जड़े दे

न जाने कहाँ

गुम हो गए

और वह वृक्ष बन

हर मौसम में

तन कर खड़ी हो गई

औरत ने सपना देखा –

फूल उसे रंग और खुशबू दे

न जाने कहाँ

गुम हो गए

और वह फूल बन

रंग और खुशबू बिखेरती

प्रकृति की छटा बन गई

औरत अचंभित हैं

अपने सपनों से

औरत जागती आँखों से

सपनों को साकार होते

देखना चाहती हैं —–

About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

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