कल वक्त मेरा भी होगा

कल वक्त मेरा भी होगा

वक्त, मैंने किताबों में पढ़ा है
करता नहीं तू किसी का इंतज़ार
माँ की कहानियों में सुना है अक्सर
फुर्सत के पल होते नहीं तेरे पास

फिर क्यों तू टुकुर-टुकुर देखता
मरता है जब कोइ निर्धन भूख से
क्यों नहीं है तुझे कोई खबर
लुटती है अस्मत जब बेटी की

तूफान बनकर आया चोरी-चोरी
बुझा दी रोशनी टूटी झोपडी की
टपका बारिश बनकर उसकी छत से
भीगा दिया कम्बल फिर गरीब का

है बस औकात तेरी इतनी कि
तू फिसल जाता है हर बार हाथ से
जिस दिन होगा वक्त लाचार का
शायद रफ़्तार तेरी थम जाएगी

यार मिले जब कभी फुर्सत तुझे
बिता कोइ रात निर्धन के घर
उसके भूखे बच्चे बताएँगे तुझे
क्या-क्या जुल्म ढाये तूने उन पर

थकता नहीं तू कभी थमता नहीं
क्या तेरी भी कोई दुनिया है
हो अगर तेरा भी कोई ठिकाना
पता उसका आकाश पर लिख देना

याद रखना वक्त अगर आज तेरा है
तो कल वक्त मेरा भी होगा
नाम तेरा होगा काल के कपाल पर
जिस दिन भी वह पल आएगा

(किशन नेगी ‘एकान्त’)

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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