कान्हा संग खेलू आज होली (होली विशेषांक)

आयी बृज में रंगबिरंगी होली रे
केसरिया रंग रंगी मोरी चोली रे
गुलाल उड़ावे कान्हा की टोली रे
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

हाथ जोड़ पडूँ तोरी पावन पैंया
चल हट छोड़ मोरी नाजुक बैंया
मोहे रंग दे आज मोरे भोले सैंया
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

कान्हा अब तो दिखा दे झलक
तुझ बिन कैसे झपकाऊँ पलक
अल्हड यौवन मोरा जाये छलक 
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

मादक फागुन भी होरी रंग में चहके
फ़ाग गावत उन्मत्त कुदरत भी महके
भांग घोलत बावरी बहार भी है बहके
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

मोरी नाजुक कमर जाये लटक लटक
मोरे यौवन को तू पी जा गटक गटक
श्याम संग चलूँ मैं भी मटक मटक
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

भांग गटक माखन चोर खेले होरी
श्याम रंग से भरी है मटकी मोरी
तेरे रंग में रंगी आज बृज की गोरी
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

कहाँ छुपो है तू नटखट नन्द लाला
छोड़ेंगी ना तुझे आज बृज की बाला
बावली भई सब जब प्रेम रंग डाला
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

श्याम रंग रंगो है जंगल जंगल
ग्वाल बाल गावत मंगल मंगल
कान्हा संग सखी करे दंगल दंगल
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

कान्हा आज क्यों ना करे मोहे तंग
रंग दू श्याम को लाल गुलाबी रंग
रचले होली रास ब्रज बाला के संग
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

ढोल मंजीरे बाजे और बाजे मृदंग
मतवाली होरी की छाई है उमंग
गोपियों संग ग्वाले करत हैं हुड़दंग
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

फाल्गुनी पवन चले सनन सनन
मोरी पॉयल झनके झनन झनन
बावरी कंगना खनके खनन खनन
आज धरती अंबर सब भयो है लाल
आज पवन भी उड़ाए अबीर गुलाल

(किशन नेगी ‘एकांत’)

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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