काफी नहीं ?

काफी नहीं ?

बैठे रहते है जब हम

खोये हूँए सपनो की खोज में ,

आसमान से टपकते

पानी से संवेदना हथेली पर

शायद फिर से संजोले !

पर ..

ये जो समय है, वो

दूर से चमककर

टूटते हुए तारे की तरहा

बिखर बिखर जाता है,

और ..आंसुओ की सतह पर

सदीओ तक चमकता रहता है,

फिर भी ज़िंदा हूँ

काफी नहीं ?

मनीषा ‘जोबन ‘

About Manisha joban Desai

born -3-11-1961 female architect-interior designer surat -gujarat- india

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