किसी की बला किसी के सर (हास्य-व्यंग)

घूँघट की ओढ़ में करुणा रस में पत्नी बोली
सुबह मंदिर जाकर पूजा-पाठ किया कीजिए
मांगो कोई वरदान अपनी अर्धांगिनी के लिए
घर आकर फिर काम दूजा किया कीजिए

तरकश से एक व्यंग वाण निकाल फिर बोली
पूजा करने से टल जाएँगी आपकी सारी बलाएँ
पत्नी व्रता के मन्त्रों का जाप कर स्वर्ग मिलेगा
सीख जाओगे तुम ज़िन्दगी की अद्भुत कलाएँ

व्यंग वाण से घायल पति तिलमिलाकर बोला
मेरे ससुर जी ने की थी मंदिर जाकर पूजा
सर्वप्रथम उन्होंने पहली कला से तुम्हें पाया
पत्नी की आज्ञा से फिर किया काम कोई दूजा

अपने घावों को देख जख्मी पति बुदबुदाया
अपनी बेटी मुझे थमा अपनी बला टाल दी
शनि की समस्त दशाएँ अपनी कुंडली की
उठाकर मेरी खुशहाल जिंदगीं में डाल दी

(किशन नेगी ‘ एकान्त’)

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.