कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है।

कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है।
ना प्यार है ना इन्तजार है…
ना भरोसा है ना विश्वास है…
आखों में नहीं बचा किसी के लिए भी सम्मान है…
फिर क्यों सम्मान के लिए लडा ये संसार हैं…
कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है।
अपनो से लड बैठे हैं…
गैरों के साथ जा बैठे हैं…
कैसे हम सब कुछ भूल गए हैं…
अपनो से ही तो ये संसार बने हैं…
कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है।
हाथों में आविष्कार है…
रहते हर किसी के पास है…
भूल गए करना सम्मान…
बाकी सब अपने पास है…
कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है।

About Ramakant Umar

I'm an Accountant in a private company and I like to write.

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