क्या द्रौपदी का नाम सुना है (हास्य-व्यंग)


क्या द्रौपदी का नाम सुना है (हास्य-व्यंग)

तुनक मिजाज पत्नी से पति ने की ठिठोली
अपने रंगीन ख़्वाबों से मैंने तुम्हें चुना है
पुरातन काल में एक अयोध्या नगरी थी
क्या तुमने राजा दशरथ का नाम सुना है

कोपभवन के शयन कक्ष से कैकेयी बोली
अयोध्या के राजा थे दशरथ मैंने सुना है
शनरंज की बिसात में मुझे घेरने के लिए
बालम, अब कौन-सा नया जाल बुना है

मसख़रा प्रेमी बन पति ने बात आगे बढ़ाई
जैसे मेरे ज़िन्दगी में हरी-भरी टहनियाँ थी
महाराजा दशरथ की ज़िन्दगी में भी कभी
सर्वगुण सम्पन्न तीन मनभावन पत्नियाँ थी

आक्रोश की प्रचंड ज्वाला बन बोली पत्नी
हाँ उनकी थी तीन रानियाँ मुझे भी पता है
पर ये राम कथा क्यों बता रहे हो तुम मुझे
रानियाँ उनकी थी इसमें मेरी क्या खता है

पत्नी के जख्मों पर पति ने किया कटाक्ष
प्रिये, तो मैं दो शादी और कर सकता हूँ
अगर ऐसा हो जाये तो इस पाप का दंड
मैं ख़ुशी से इसी जन्म में भर सकता हूँ

बेचैन पत्नी बोली द्रोपदी का नाम सुना है
तुम्हारी राह मैं चली तो हो जाओगे लाचार
सुन कर ये जवाब पति लगा गिड़गिड़ाने
रहने दे पगली तू भी दिल पर मत ले यार

(किशन नेगी ‘एकान्त’ )

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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