क्यूँ है

 

आँख मे है आँसु;
फिर होठो पर इतनी
मुस्कान क्यूँ है?,
क्यूँ दोहरी जिन्दगी
जीते है हम,
आखिर हर कोई
इतना परेशान क्यूँ है?

अच्छे काम करना ही
ज़िन्दगी है अगर,
तो बुराई का रास्ता
इतना आसान क्यूँ है?

जब जाना ही है सबको
एक ही जगह पर,
तो पग-पग पर
इतने इम्तेहान क्यूँ हैं?

गुलश़न है अगर
सफर ज़िन्दगी का,
तो मन्जिल फिर इसकी
शमशान क्यूँ है?

जीना है अगर
मरने ही के लिये,
तो जीने का हम मे
अरमान क्यूँ है?

जो मुस्किल है मिलना लग जाता है
दिल अकस़र उसी से,
आखिर दिल भी इतना
नादान क्यूँ है?

आँख मे है आँसु;
फिर होठो पर इतनी
मुस्कान क्यूँ है???? 🙁

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