क्यों उजाड़ी ख्वाबों की दुनियां

ख्वाबों में जब तुम आई गोरी
बिजली चमक कर गिर पड़ी
ख्वाब सारे दफ़न हुए जल कर
बरसने लगी अंगारों की झड़ी

कुछ ख्वाब जो जिन्दा थे अभी
टूट गई उनकी नाजुक कड़ी
जलकर ख़ाक हुए अरमान सभी
ख्वाबों ने देखी वह अशुभ घड़ी

दहकी थी ज्वाला तेरे हुस्न की
तुम मुस्कुरा रही थी वहीं खड़ी
यौवन के गुमान में भटकी थी
थामे हाथ में अहंकार की छड़ी

जिन ख्वाबों ने था तराशा तुझे
उन्हीं ख्वाबों से क्यों तू लड़ी
हुस्न की आग में जलाया उनको
जिन ख्वाबों संग तू पली बड़ी

उतरेगी जब यौवन की ख़ुमारी
याद करोगी तब सावन की झड़ी
वक्त किसी का नहीं होता जानम
ख्वाबों की भी आएगी शुभ घड़ी

ख्वाबों में जब तुम आई गोरी
बिजली चमक कर गिर पड़ी
ख्वाब सारे दफ़न हुए जल कर
बरसने लगी अंगारों की झड़ी

किशन नेगी ‘एकांत’

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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