खुश रहूं

जिन्दगी है छोटी,
हर पल मैं खुश रहूं,
आज गाड़ी में जाने की औकात नहीं
दो कदम चल के ही खुश रहूं
आज किसी का साथ नहीं
किताब पड़ के ही खुश रहूं
आज कोई मुझसे नाराज है
उसके इस अंदाज में भी खुश रहूं
जिस को भूला नहीं सकता
उसके बिना भी खुश रहूं
जिस को पा नहीं सकता
उसकी याद में खुश रहूं
बीता हुआ कल बताता
मीठी यादों में खुश रहूं
हंसते हंसते पल बीते
इस सोच के लिये

हर हाल में खुश रहूं
जिन्दगी है बहुत छोटी
अब नहीं तो कब खुश रहूं
संकेत मुरारका द्वारा प्रेषित

 

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