ख्वाब जो टूट कर बिखर गए

तुझसे मिलने के बाद
मेरे दिल की धड़कनों में
सपनों के नन्हे बीज अंकुरित होने लगे
हर क्षण इन हसीन सपनों में कुछ नए सपने
जन्म लेने लगे, इन सपनों को सदा
अपने दिल से लगाए रखता
सपने खिलने लगे, कोपलें आने लगी
मैं उनकी खिलने की छटपटाहट महसूस करता
उन सपनों में मुझे बस तेरी ही तस्वीर दिखती
जैसे हर सपना तेरे ही दिल की धड़कन हो
जब कोई सपना रोता, जैसे तू रो रही हो
जब कोई सपना मुस्कुराता, जैसे तू मुस्कुरा रही हो
जब कोई सपना सिसकता, जैसे तू सिसक रही हो
जब कोई सपना अंगड़ाई लेता, जैसे तू अंगड़ाई ले रही हो
मेरी दुनिया इन सपनों में सिमट कर रह गई थी
हर सपना मेरे दिल में
चाँद और सूरज की भांति चमकता था
जब सपने खिलखिलाते तो
ऐसा प्रतीत होता था जैसे
चाँद के आँगन में नन्हे-नन्हे सितारे झूम रहे हैं
शीतल बयार के झोंके उनको लोरी सुना रहे हैं
चाँद की चांदनी उनको पुचकार रही है
और नील गगन अपने नीले आँचल की शीतक छाँव में
उनको प्यार से सहला रहा है
चमचमाती ओस की कोमल बूंदें इन्हें देखकर मचलती थी
बारिश की नहीं-नहीं बूंदें इन सपनों से संग गुनगुनाती थी
लेकिन एक दिन अचानक इनकी दुनिया ही उजड़ गई
जब इन सपनों ने तुम्हें
किसी गैर के लिए तड़पते देखा
तुम्हारे दिल को किसी गैर के लिए धड़कते देखा
जब तुझे किसी गैर की बाहों में मचलते देखा
धीरे-धीरे ये मासूम सपने मायूस होने लगे
इनके हर पल अधीर होने लगे
कुम्हलाने लगे, उदास रहने लगे
इनकी गालों की लालिमा धूमिल पड़ने लगी
इनकी मुस्कराहट को जैसे किसी ने चुरा लिया हो
ये नन्हीं कलियाँ मुरझाने लगी
एक दिन इन कोमल सपनों ने दम तोड़ दिया, और
डाल के सूखे पत्तों की भांति
टूट कर बिखर गए

(किशन नेगी ‘एकांत’)

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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