गजल

मैंने मनाना छोडा नहीं,

तुमने रूठना छोडा नहीं।

 

हर- पल तुमको प्यार किया मगर,

तुमने सताना छोडा नहीं।

 

हार गये प्यार में, इस कदर हम,

तुमने हराना छोडा नहीं।

 

खुशी हमारी खो गयी, जाने कहां,

तुमने मुस्कुराना छोडा नहीं।

 

तुमने लाख बदल दिये, ठिकाने मगर,

हमने तेरी गली में जाना छोडा नहीं।

 

तुम खुदगर्ज हुए इतने मगर,

हमने दुनियां को हंसाना छोडा नहीं।

 

हमे अपने दिल से निकाला, यूं तुमने,

हमने दिल लगाना छोडा नहीं।

 

कसमे- वादे निभाते रहे सदा हम,

प्यार में तुमने झूठी कसमे खाना छोडा नहीं।

 

क्या? उम्मीद करे सजल, प्यार की तुमसे,

तुमने तो हमे आजमाना छोडा नहीं।

 

संजय नेगी ‘सजल’

 

 

 

2 Replies to “गजल”

  1. हार गये प्यार में, इस कदर हम,
    तुमने हराना छोडा नहीं।
    Nice lines sir

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