घर की याद आती है

घर की याद आती है

परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है,
तीज त्योहारों पर जब काम से थका हारा आता हूँ,
होली के रंगो और दीवाली के दीपों की याद सताती है।
परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है।।

गलतियां जब भी होती है, डांट सुनकर खामोश रह जाता हूँ,
ना भी हो गलती फिर भी जाने कितना सह जाता हूँ।
सोचता हूँ मेरा मुल्क होता तो सबक सिखाता,
और कुछ नही तो सलिखे से मैं भी दो बातें सुनाता।।
परायेपन के एहसास में आँख भर आती है,
परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है।।

जब माँ फोन पर पापा की बेबसी बताती है,
जब बीवी मेरी बात करते करते रो जाती है।
जब नन्हे बच्चे की किलकारी फोन पर सुनाई देती है,
जब अपने ही बच्चे की फ़ोटो फेसबुक पर दिख जाती है।।
ऐसे में एक अजीब सी उदासी छा जाती है,
परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है।।
***नि-3कलाल***

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About Nitin Kalal

From Dungarpur (raj.) Work at Kherwada... i like to express my fillings by poems... I'm not so good like other writers but always try to learn and trying to being perfectionist. gmail- ni3kalal@gmail.com contact no.-8107440773

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