चहूँ ओर से अच्छी बातें

चहूँ ओर से अच्छी बातें

 

आ नो भद्राः ऋतवो यन्तु विश्वतः

Let noble thoughts come to us from all side

__Rigveda, 1.89.1

                        

चहूँ ओर  से   अच्छी  बातें

मुझ  तक  हरदम  आने  दो

औ प्रकाश की किरणों को भी

अन्तरमन   में    छाने  दो

 

जिस पथ पर मैं चलना चाहूँ

उस  पथ  तू  भी साथ रहे

गिर जाऊँ  तो  मुझे  उठाने

तेरा  ही  बस   हाथ  रहे

 

और राह के  पत्थर  कंकड़

तुझे  देख   सब  दूब  बने

चल न सकूँ तो भी मन मेरा

संग   तुम्हारे  साथ   चले

 

 

बिन साये के पथ पर भी तुम

मुझको    मत  मुरझाने  दो

चहूँ ओर  से   अच्छी  बातें

मुझ  तक  हरदम  आने दो

 

कहते हैं यह जग सागर है

पार  इसे  ही  करना  है

जीवन नैय्या छोटी-सी  है

साँसों को  बस  गिनना है

 

तूने  है  पतवार सम्हाली

पार  तुझे  ही  करना है

तूफाँ में  भी  साथ हमारे

अंतिम क्षण तक रहना है

 

लहरों का सा उमड़ उमड़कर

तट  तक  मुझको  जाने दो

चहूँ ओर  से  अच्छी  बातें

मुझ  तक  हरदम  आने दो

 

बगिया  में भ्रमरों जैसा ही

गुंजन  करना   मैं  सीखूँ

बुलबुल की बोली अपनाकर

प्यार  लुटाना   मैं  सीखूँ

 

गीतों के  गजरों में गुँथकर

महक  अनोखी  पा जाऊँ

मुस्कानों की  परिभाषा भी

तेरे   अधरों  से   सीखूँ

 

कष्ट दुखों को जीत सकूँ मैं

ऐसा   जीवन  जीने   दो

चहूँ ओर  से  अच्छी बातें

मुझ  तक  हरदम आने दो।

—-      ——-     —-      भूपेंद्र कुमार दवे

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