चुप्पी

चुप्पी

चुप वह है

जो सबकुछ जानता –

चुप वह भी

जो कुछ नहीं जानता

कुछ ऐसे भी

-सबकुछ जानने का

वहम पालते है-

वे कभी चुप नहीं रहते

कुछ वे है

जो चुप्पी को

लबादा की तरह ओढ़ते

अजीब सी दुविधा में रहते

न बोल सकते

न चुप रह सकते

कसमसाहट में जीते

बेबसी में मर जाते

किन्तु उनकी चुप्पी

व्यर्थ नहीं जाती

चुप रह कर भी

बहुत कुछ कह जाती

आँखों से

हाथ के इशारों से

पाँव की गतियों से

सम्पूर्ण शरीर से गुजरती

एक से दूजे में

संवहित हो

कलम/तुलिका/मुद्राओ से

प्रदर्शित होती रहती

सृजित कलाएँ

बहुआयामी हो

नदी की धाराओं सी

अनेक विधाओं में

बँटती  जाती

चुप्पी भेधने की कला का

ज्ञान प्राप्त कर

निकल पड़ता

पथिक चुपचाप

कहने न कहने की

विवशता से मुक्त

चुप्पी से

गहन मौन की यात्रा पर ——–

About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

2 Replies to “चुप्पी”

  1. Hi Poonam ji, nice poetry on ‘SILENCE’. liked it keep writing.

    “Waiting for beauful words
    from your soul, but
    till how long will you be silent,
    I can’t wait any more, and
    wish to get lost
    in your colourful words
    like rainbow in the horizon
    now break your silence
    to let your feelings come out soul”

    kishan

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