जज़्बात

जज़्बात

उदासी में दिल को आँसु से राहत कहाँ मिले

जुगनुओं से रोशन रात को रौशनी ना मिले

आंखों से बरस पीड़ा का सैलाब उमड़ पड़े
जज़्बातों को मिटा दे वो हमदर्द कहाँ मिले

रखता दिल में महफूज़ अपने अरमान सारे
कोई हमसफ़र या हमदर्द जब मुझे ना मिले

हर वक़्त सभी बदगुमानी दिल पे भारी पड़े
अब दर्द नहीं होता मुझे जब खूशी ना मिले

आँसू को कितना समझाया बेवक्त ना झरे
सजन सभी एहसासों का कभी जवाब ना मिले

सजन

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