डिग्री

पुछा था किसी साहबज़ादे ने,
जब छोटा था,

कि पढ़ लिखकर तुम क्या करोगे;
ये डिग्री है किस काम की?
कहा कि, कुछ नही चाचू
“बच कलम उठाकर लिक दुँगा मै;
हिस्टरी हिन्दुच्तान की”…….

2 Replies to “डिग्री”

  1. (Y) बढ़िया बात, बहुत मनभाई …!
    Degreeon ko gyaan samajhnaa
    aisaa hai ye moorkh jamaanaa
    skill development kii baat chali jo
    vidyaa kaa hai sahii thikaanaa…! 😉

  2. धन्यवाद.. 🙂 :-)… .. मेरे शब्दों की सही पकड़ मिल गयी आपको…. 🙂

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*