ताकि

गाज़ गिरानी ही हो तो एक-एक कर गिराना ज़िंदगी
ताकि इंसान गिरे तो, पर फिर संभलता भी रहे

तू ढा ले सितम , जितना तेरे बस मे हो , पर ताकीद रख
अरमान तुझे पाने का, दिल मे मचलता भी रहे
मुझे सज़ा देनी ही हो तो थोड़ी नरमी बरतना, ताकि 
बरी होने की उम्मीद मे गुनहगार सुधरता भी रहे  अमावस आए तो दीयों को हवाओं से बचाकर रखना

ताकि दिल की आग बुझती भी रहे, गुबार निकलता भी रहे  जो कुछ सीखना हो मुझसे, तो गुनाह करना सीख ले जिंदगी

ताकि दिल मोम की तरह जमता भी रहे, पिघलता भी रहेदिन का थका-मांदा सूरज शाम को ढले तो ढले
पर शर्त ये है कि, चाँद आसमां पर निकलता भी रहे

गाज़ गिरानी ही हो तो एक-एक कर गिराना ज़िंदगी
ताकि इंसान गिरे तो, पर फिर संभलता भी रहेमुरारी सिंह
( बेगूसराय , बिहार )

About MURARI SINGH

लिखने की नेमत छीन भी ले, 'गर खुदा किसी गलियारे मे मेरी पहचान रहेगी तुझसे ज़िंदा, कहता है मुझसे दिल मेरा

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