तुम्हारे मिलकर जाने के बाद

तुम्हारे मिलकर जाने के बाद

क्या रहस्य है यह
आखिर क्यों हो जाता है
बेमानी और नागफनी-सा दिन
तुम्हारे मिलकर जाने के बाद…

क्यों हो जाती है उदास मेरी
तरह घर की दीवारें-सोफा
मेज पर धरी गिलास-तश्तरियाँ
और हंसता-बतियाता पूरा का पूरा घर…

क्यों डरने लगते हैं हम मन ही मन मौत से  तुम्हारे मिलकर जाने के बाद…

क्यों हमारी पूरी दुनिया और खुशियाँ
सिमटकर समा जाती है तुम्हारे होठों की मुस्कुराहटों में
तुम्हारे मिलकर जाने के बाद…

क्यों घंटो हँसता और बोलता बतियाता
रह जाता हँ मैं तुमसे
तुम्हारे जाने के घंटों बाद भी…

क्यों महसूसने लगता हूँ मैं
एक अजीब-सी रिक्तता और व्याकुलता
तमाम सुख सुविधाओं के होते हुए भी
तुम्हारे जाने के बाद…

क्यों बार-बार तुम्हारी ही पहलू में
लौट जाने को मचलता है मन
सागर की लहरों की तरह…

क्यों उलझा रहने को करता है मन
तुम्हारे ही ख्यालों विचारों में दिन-रात
माला में धागा की तरह तुम्हारे मिल कर जाने के बाद…

डॉ. विवेक कुमार
तेली पाड़ा मार्ग, दुमका, झारखंड।
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

About डॉ. विवेक

नाम : डॉ0 विवेक कुमार, पिता का नाम: डॉ0 यू0 एस0 आनंद शैक्षणिक योग्यता : एम0 ए0 द्वय हिंदी, अर्थशास्त्र, बी0 एड0 हिंदी, पी-एच0 डी0 हिंदी, पीजीडीआऱडी, एडीसीए, यूजीसी नेट। उपलब्धियाँ : कादम्बिनी, अपूर्व्या, बालहंस, चंपक, गुलशन, काव्य-गंगा, हिंदी विद्यापीठ पत्रिका, जर्जर-कश्ती, खनन भारती, पंजाबी-संस्कृति, विवरण पत्रिका, हिंदुस्तान, प्रभात खबर,राँची एक्सप्रेस, दक्षिण समाचर, मुक्त कथन, वनवासी संदेश, प्रिय प्रभात, आदि पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणी केन्द्र, भागलपुर से समय-समय पर रचनाओं का प्रसारण. प्रकाशित कृति ‘संजीवनी ’ ( कविता संग्रह ) अप्रकाशित कृतियाँ : ...और बारिश थम गई ( बाल कहानी-संग्रह )। पुरस्कार/सम्मान: नेहरु युवा केन्द्र द्वारा निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार एवं दक्षिण समाचार, हैदराबाद बाल कहानी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार. ई-मेल- vivekvictor1980@gmail.com vivekvictor1980@rediffmail.com पूरा पता- डॉ. विवेक कुमार, तेली पाड़ा मार्ग, दुमका-814 101, (झारखंड)

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