तुम गर मेरा साथ निभावो

तुम गर मेरा साथ निभावो
पतझर भी मुझको मधुमास लगेगा
मुझको मेरा जीवन खास लगेगा।

सुख तो है श्रंगार स्वयं का
पर शुभ अवसर का प्यासा है
दुख छलका करता है जिसमें
जीवन आँसू का प्याला है।

तुम गर आँसू पोंछ सको तो
विष में भी अमृत का वास दिखेगा
मुझको मेरा जीवन खास लगेगा।

मूक स्वरों को उर से चुनकर
मधुर रागिनी गा पाऊँगा
पीड़ा के व्याकुल सुर सारे
मुस्कानों से सजने दूँगा

तुम संगीत प्रवाह बनो तो
मेरे गीतों को नवसाज मिलेगा
मुझको मेरा जीवन खास लगेगा।

हर पथ पर काँटें हैं बिखरे
पग पग पर हर पल हैं चुभते
थका हुआ-सा सफर साँस का
चलता भी है थमते रुकते

तुम साँसें कुछ सजा सको तो
मिटती साँसों का विश्वास जगेगा
मुझको मेरा जीवन खास लगेगा।

तुम बिन किश्ती टूटी लगती
लहरों से भी डरती दिखती
और किनारे पड़ी हुई सी
सीपी की कतरन-सी दिखती

तुम गर आँधी थाम सको तो
तूफानों का हर अभिशाप मिटेगा
मुझको मेरा जीवन खास लगेगा।

पतझर भी मुझको मधुमास लगेगा
मुझको मेरा जीवन खास लगेगा।

….. भूपेन्द्र कुमार दवे
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