तुम सरहद के वीर सिपाही हो

तुम कर्मठ हो, बलशाली हो
तुम सरहद के वीर सिपाही हो

तुम पुण्य धर्म के अनुयायी हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो
तुमने वेदों से जीना सीखा है
सच्चाई के बल चलना सीखा है
तुमने गीता का पथ अपनाना सीखा है
तुम सच्चेे प्यारे हिन्दुस्थानी हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो।

तुमने सूर्य उदित होते देखा है
उसकी गरिमा को बढ़ते देखा है
गंगा में वही अवतरित होते देखा है
तुम इन प्रखर किरण के साथी हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो।

जंजीरें तुमने खुलती देखी है
तुमने आजादी आती देखी है
खुद कुछ कर सकने की चाहत भी देखी है
तुम कर्मठ हो, बलशाली हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो।

तुमने जिस माँ का आँचल पाया है
उसमें ममता का अद्भुत साया है
तुमने करुणा में उपजा जीवन पाया है
तुम श्रद्धा की उज्वल की बाती हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो।

अपने अंतः बापू उपजाया है
सत्य, अहिंसा का पथ अपनाया है
पर रण में तुमने हरदम शौर्य दिखाया है
तुम सरहद की शान निराली हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो।

राष्ट्रध्वज तुमसे ही लहराया है
दुश्मन तुमसे डरता कतराता है
तुमने सबक शौर्य का सबको सिखलाया है
तुम हुँकार जन जन की वाणी हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो।

तुम कर्मठ हो, बलशाली हो
तुम सरहद के वीर सिपाही हो
तुम ही सच्चे भारतवासी हो।
….. भूपेन्द्र कुमार दवे
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