तुम हो ॥

इस गीत की महफिल में,
अन्दाज मेरा तुम हो,

इस हुस्न की बारिश में,
सबसे जुदा तुम हो,

राह बङी हो कितनी भी,
मंजिल मेरी तुम हो,

पाया सब कुछ मैनें,
जो खोया वो तुम हो……

‘विराज़’

Advertisements

About "विराज़"

"Poet"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*