तेरा रसमय गीत निमंत्रण

तेरा रसमय गीत निमंत्रण
मेरे प्राणों ने जब पाया
प्राण पखेरू बन पीड़ा के
यह कोमल गीत चुरा लाया।

‘तुझसे मिलकर भेंट चढ़ाने
अर्पित कर दूँ अनुपम माला’
यही सोचकर गूँथी मैने
आँसू से गीतों की माला

बनी ना जब पंक्ति नूतन-सी
कुछ भक्ति गुच्छ चुरा लाया
तेरा रसमय गीत निमंत्रण
मेरे प्राणों ने जब पाया।
प्राण पखेरू बन पीड़ा के
यह कोमल गीत चुरा लाया।

तेरे गीतों का स्वर पाने
घुँघरू मिथ्या के सब तोड़े
और अहं की जंजीरें सारी
माया के बंधन भी छोड़े

नवपल्लव की झांझर ध्वनि को
मैं पवनदेव बन ले आया
तेरा रसमय गीत निमंत्रण
मेरे प्राणों ने जब पाया।
प्राण पखेरू बन पीड़ा के
यह कोमल गीत चुरा लाया।

तेरी वीणा के सुर पाने
तार साँस के सब छिन्न किये
मृत्यु-लोक से अमरलोक तक
सभी अवरोध प्रच्छन्न किये

प्रिय मृदु बोल गगन के सारे
मैं घन सावन बन ले आया
तेरा रसमय गीत निमंत्रण
मेरे प्राणों ने जब पाया।
प्राण पखेरू बन पीड़ा के
यह कोमल गीत चुरा लाया।

तेरी सुमधुर लय को पाने
विमुख हुआ जीवन लहरों से
श्रद्धा झोली भरी देखकर
मौन हुआ अपने अधरों से

कूद पड़ा हूँ भवसागर मैं
देखो क्या क्या चुनकर लाया
तेरा रसमय गीत निमंत्रण
मेरं प्राणों ने जब पाया।
प्राण पखेरू बन पीड़ा के
यह कोमल गीत चुरा लाया।
भूपेन्द्र कुमार दवे
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