बड़ी अजब सी वो “तड़प” थी,
लगता है जैसे खुद की,
खुद से ही “झड़प” थी
जब खड़ा दूर होकर मै,
“रोता” तुम्हे देखता था..
मै “जलता”;
तुम्हे देखता था,
“तड़पती” थी तुम और मै;
“तड़पता” तुम्हे देखता था….

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