दर्द

बात ऐसी कह गए सोचा भी न कि हम पर गुजरेगी क्या ,
दर्द दिल में हुआ बिना आवाज था उनको पता क्या ,
सहें भी कितना हम ये उनसे पूछना तो चाहते है भला,
सुनने वाला न कोई यहाँ हाले दिल करें जो बयां ॥
उनकी बातों ने आज दिल के टुकड़े कर दिए  हैं हजार,
ढूंढेंगे भी तो भी न मिलेगा एक यहाँ और एक वहाँ क्या ,
चुभन को महसूस कर लिया कह न सकेंगे किसीसे ,
ऐसा तनहा उनकी बातों ने आज  हमको कर दिया ॥

नासूर सा दर्द दिल को दे दिया सोच भी नहीं ,

                                                   हम तो आपके ही थे हमको फिर ऐसा दर्द क्यूँ अपने दिया ॥

2 Replies to “दर्द”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.