दिल का अरमान

दिल का अरमान

आंसमा में आज एक,
अलग ही उफान है,

मिलना है प्रियतम से,
जो दिल का अरमान है,

पर बाधा में डाल दिया,
हुई जब बरसात है,

रुक जाऊ या चलता रहू,
इसी मे अटकी जान है,

अब ना तीर है यहां,
ना ही बस में कमान है,

उसी का नाम हर वक्त,
होती ये जुबान है,

मिलना है प्रियतम से,
जो दिल का अरमान है ॥

‘विराज’

About "विराज़"

"Poet"

2 Replies to “दिल का अरमान”

  1. साधारण शब्दों में सुन्दर विवरण प्यार की बेकरारी का।

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