दुश्मनी

तेरे चन्द अल्फाज़ों ने,
मुझे रोक रखा है, वरना!

प्यार से मेरी,
गहरी दुश्मनी थी कभी ॥

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“दर्द “

मत पूछों की कैसा हूं मैं,–

उजड़ कर फिर बसना,
आसान नहीं होता ॥

About "विराज़"

"Poet"

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