नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा

वो नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा
करता मुझे आकर्षित
फूलो की सुगंध सी भूतपूर्व कल्पना
है दृष्टी अवलोकित

हरे – भरे खेतो की पगडंडी पर आना – जाना ।
इंद्रधनुष सी तितलीयों संग धमा – चोकड़ी मचाना ।
एक मनोहर मुस्कान संग फूलो का सहलाना ।
ढूँढना पागलो सा कोयल के गीतों को , जो मन को भाता ।।

वो नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा
है दृष्टी अवलोकित

पेड़ो के पीड़ित डाल पर मित्रों संग उछल – कूद मचाना ।
नदी किनारे बैठ गोपियो का मख़ौल उड़ाना ।
तंग करने वालों को गीतों का रसपान कराना ।
घंनघोर बादल ,वर्षा संग हर्षित हो;नृत्य का आनंद उठाना ।
वर्षा भरित आँगन जल में कागज का नाव चलाना ।।

वो नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा
है दृष्टी अवलोकित

पंकज कुमार (+919504482723)
Pankaj509kumar@gmail.com

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